पा‍रसियों की परंपरा में तब्दीली, मौत के बाद पक्षियों के खाने के...

पा‍रसियों की परंपरा में तब्दीली, मौत के बाद पक्षियों के खाने के लिए छोड़ दिया जाता था शव

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पा‍रसियों में एक परंपरा है की मौत के बाद शव को पक्षियों और जानवरों के खाने के लिए छोड़ दिया जाता है। जिसका कारण है गिद्धों की कम होती संख्‍या। गुजरात में पारसी समुदाय अंतिम संस्‍कार की अपनी सदियों पुरानी परंपरा को छोड़कर दफनाने की पद्धति को अपना सकता है। गुजरात के नवसारी में बैठक में शव को दफनाने के पक्ष में समुदाय के लोगों ने भारी समर्थन दिया।

बैठक में इस विषय पर चर्चा की शव को दफनाने या उसे खुले में छोड़नेए दोनों तरीके चलते रहेंगे और परिवार को अंतिम संस्‍कार का तरीका चुनने की आजादी होगी। पारसियों में अंतिम संस्‍कार में बदलाव का यह पहला मामला नहीं है। बेंगलुरु और सोलापुर में भी इस तरह की अनुमति दी जा चुकी है।

पारसी समुदाय दोखमेनाशिनी पद्धति में विश्‍वास करती है। इसमें शवों को कुंओं के अंदर छोड़ दिया जाता है या फिर सूरज की रोशनी में दखमास में मांस खाने वाले पक्षियों के लिए छोड़ दिया जाता है। लेकिन गिद्धों की घटती संख्‍या के चलते अंतिम संस्‍कार का तरीका बदलने की मांग उठ रही है।

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