सांप्रदायिकता की बढती वृद्धि से प्रधानमंत्री चुप क्यों है- मौलानाअरशद मदनी

सांप्रदायिकता की बढती वृद्धि से प्रधानमंत्री चुप क्यों है- मौलानाअरशद मदनी

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Jamiat Ulema-e-Hind President Maulana Arshad Madani address to the gathering during National Integration Conference in New Delhi on 12/03/16. Photo by K.Asif

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने पहली बार पर्सनल लॉ पर अपने विचार व्यक्त किये। औरंगाबाद में राष्ट्रीय एकता सम्मेलन को संबोधित कर करते हुए कहा कि देश के संविधान ने हर नागरिक को अपने अपने पर्सनल ला पर अमल करने का अधिकार दिया है और संविधान से प्रिय कोई नहीं है।

इस सम्मेलन में अरशद ने कहा कि देश में मुस्लिमों और दलितों को अगर ऐसे ही निशाना बनाया जाता रहा तो यह देश फिर विभाजन के कगार पर पहुंच सकता है। मुस्लिम पर्सनल ला में अगर बदलाव करनी है तो इसके लिए मुसलमानों की राय ली जाए न कि पूरे देश की। मौलाना सैयद अरशद मदनी ने जमीयत के लगातार संघर्ष और इतिहास से नई पीढ़ी को अवगत कराया और देश की स्वतंत्रताए पुनर्निर्माण और सांप्रदायिकता से मुकाबला में जमीयत के प्रयासों का उल्लेख किया।

मौलाना मदनी ने अपने संबोधन में ला आयोग प्रश्नावली का हवाला देते हुए आयोग के इरादे को संदिग्ध बताया और यह स्पष्ट किया कि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने इसका बहिष्कार क्यों किया।साथ ही साथ मौलाना ने मौजूदा दौर में सांप्रदायिकता की बढती वृद्धि के लिए प्रधानमंत्री की चुप्पी पर कटाक्ष भी किया धार्मिक नेताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और आपसी एकता के संदेश को सार्वजनिक करने पर जोर दिया। अधिवेशन में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से एक संकल्प भी पारित किया

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