मुसलमानो के लिया अमेरिका चुनावीं का मतलब

मुसलमानो के लिया अमेरिका चुनावीं का मतलब

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दुनिया की नज़रों में अमेरिका इस्लाम विरोधी देश माना जाता है! अब ट्रम्प ने इस सोच में आग में गहि डालने का कलाम किया है! उन्होंने कई ऐसे आपत्तिजनक ब्यान दे दिए है जिससे उनको इसका भरी नुक्सान उठाना पढ़ सकता है! ऐसे में देखना ये है की मुस्लिम समाज इन चुनावों को किस रूप में लेगा! अमरीकी चुनाव में रिपबल्किन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप ने अपनी रैलियों में मुसलमानों के अमरीका में घुसने पर रोक लगाने की बात कही और उन पर चरमपंथ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया तो ये कोई नई बात नहीं है!

पेरिस हो या फ़्लोरिडा, पहले भी चरमपंथी हमले के बाद यहां इस तरह की बातें सुनाई देती थीं!  मुसलमानों पर उंगलियां उठती थीं, लगता था जैसे सभी आंखें उन्हीं को देख रही हों!इस बार फ़र्क ये था कि ट्रंप ने उस सोच को मुख्यधारा की सोच बना दी! जो बातें दबी ज़ुबान में कही जाती थीं वो खुलकर कही जाने लगी!

ट्रंप ने मुसलमानों पर पैनी नज़र रखने की बात की, बगैर वारंट मस्जिदों की तलाशी की बात की! उन्होंने एक ऐसे टेस्ट की बात की जिसके ज़रिए इस बात की जांच हो सके कि अमरीका में आने वाला मुसलमान कहीं शरिया क़ानून में यकीन तो नहीं रखता! इस्लामिक स्टेट और दूसरे चरमपंथी गुटों से निपटने का एक ही तरीका उन्होंने सामने रखा और वो ये कि उन पर बमबारी की जाए और उन्हें मटियामेट कर दिया जाए! और उनकी बढ़ती लोकप्रियता से साफ़ था कि उनके समर्थक इन बातों से सहमत थे! ट्रंप ने वो बात कही है जो कहने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था!

musइस तरह की बातें कई जगहों पर सुनने को मिलीं और ये सब ट्रंप के कट्टर समर्थक हैं लेकिन दूसरी तरफ़ ट्रंप की इन बातों ने पहली बार अमरीका में रहनेवाले मुसलमानों को भी मुख्यधारा में शामिल होने पर मजबूर किया है!

मंसूर कुरेशी वर्जीनिया में रहते हैं और उन्होंने “साउथ एशियंस फ़ॉर हिलेरी क्लिंटन” के नाम से एक मुहिम की शुरूआत की है! उनका कहना है लगभग 33 लाख मुसलमान अमरीका में रहते तो हैं लेकिन वो मेनस्ट्रीम या मुख्यधारा का हिस्सा नहीं बनते और बहुत कम हैं जो वोट डालने निकलते हैं! “हमने वीडियो और टेलीफ़ोन कैंपेन के ज़रिए उन्हें उनके वोट की अहमियत बताने की कोशिश की है!” कुरेशी कहते हैं कि मुसलमान कुल आबादी के दो फ़ीसदी हैं और इस बार के चुनावों में ये वोट जीत और हार का फ़ैसला कर सकते हैं!

स्विंग स्टेट कहे जानेवाले कई राज्यों में इस्लामिक सेंटर्स और मस्जिदों ने मुसलमानों को एकजुट किया है और अमरीकी मुसलमानों के लिए काम करने वाली एक संस्था के अनुसार 86 प्रतिशत मुसलमान इस बार वोट डालने का इरादा रखते हैं! अमरीका में मुसलमान फ़ौज में हैं, पुलिस में हैं और कई अहम ओहदों पर हैं! लेकिन ट्रंप ने जिस तरह से मेक्सिको से आए सभी लोगों को अपराधी और बलात्कारी का नाम दिया, उसी तरह सभी मुसलमानों को भी आतंकवाद के रंग में रंग दिया!

इराक की जंग में मारे गए पाकिस्तानी-मूल के फ़ौजी कैप्टन हुमायूं ख़ान के पिता खिज़्र ख़ान ने डेमोक्रेटिक कन्वेशन में इस बात को उठाकर ट्रंप से कहा था कि शायद उन्हें अमरीका का संविधान पढ़ने की ज़रूरत है! अमरीका में काफ़ी लोगों ने खिज़्र ख़ान की सराहना की थी और ट्रंप उनपर भी हमला करने से नहीं चूके!

चुनाव के आख़िरी दिनों में हिलेरी क्लिटंन की टीम ख़िज़्र ख़ान को भी इश्तहारों में इस्तेमाल कर रही है और वो ख़ुद भी मुसलमानों से वोट डालने की अपील कर रहे हैं!.

ट्रंप के समर्थकों में से 89 प्रतिशत का ये कहना था कि आतंकवाद उनके लिए अर्थव्यवस्था जितनी ही अहमियत रखता है!  वहीं हिलेरी क्लिंटन के समर्थकों में 74 प्रतिशत के लिए आतंकवाद अहम मुद्दा है! लेकिन कुल मिलाकर देखा जाए तो इस चुनावी बहस में अमरीकी मुसलमानों को या तो चरमपंथ के चेहरे की तरह पेश किया गया है या फिर आतंकवाद के ख़िलाफ़ सरकार के आंख और कान की तरह!

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