यूपी में चुनावों का माहौल परंतु इंसाफ के लिए तरस रहे मुस्लिम...

यूपी में चुनावों का माहौल परंतु इंसाफ के लिए तरस रहे मुस्लिम नौजवान

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उत्तर प्रदेश में चुनावों का माहौल है जहां सभी पार्टीयां ज़ोर शोर से यूपी में जीत का परचम लहराने में लगी हैं! ऐसे में सभी राजनैतिक दल छोटे छोटे मुद्दों को उठाकर बवाल खड़ा कर देते हैं पर हैरत की बात तो यह है किसी भी पार्टी या नेता का ध्यान बेकसूर नजीब अहमद, तारिक कासमी एवं खालिद मुजाहिद पर नहीं गया!

गोरतलब है की 12 दिसम्बर 2007 को मायावती सरकार में तारिक कासमी को उनके घर से कुछ दूरी पर रानी सराय चेकपोस्टए आजमगढ़ से सादी वर्दी में बिना नम्बर प्लेट वाली गाड़ी में एसटीएफ ने अगवा कर लिया था! जिसके खिलाफ पूरे आजमगढ़ में आंदोलन शुरू हो गया था! इसके बाद मड़ियाहूंए जौनपुर से उठाए गए खालिद मुजाहिद को 22 दिसम्बर 2007 को आतंकी बताकर बाराबंकी स्टेशन से उठाकर फर्जी गिरफ्तारी की थी! पुलिस की इस साम्प्रदायिक और आपराधिक कार्यशैली पर पूरे सूबे में बेगुनाहों की रिहाई जनआंदोलन का उभार हुआ था! जिसके दबाव में तत्कालीन मायावती सरकार ने इस फर्जी गिरफ्तारी पर जांच के लिए जस्टिस निमेष कमीशन का गठन भी किया था! इसी निमेष कमीशन ने तारिक और खालिद की गिरफ्तारी को फर्जी बताते हुए दोषी पुलिस और खुफिया अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी!

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इसके बाद अब नजीब अहमद को लापता हुए करीब डेढ़ महिना हो गया है और नजीब की मां ने ऐसा कोई दरवाज़ा नहीं है जो खटखटया ना हो परंतु कोई भी उनकी पुकार सुनने को तैयार नहीं है! गोरतलब है की कुछ दिन पहले नजीब की मां ओवैसी से भी मिली थीं! लेकिन जहां तक सवाल है यूपी की सियासत का वहां अभी तक कोई भी पार्टी नजीब की मां के साथ नहीं दिखी है!

फिलहाल भारत सरकार हो या फिर यूपी के चुनावी तैयारीयों में लगी अन्य राजनैतिक दल परंतु उनको केवल कुर्सी ही दिखाई देती है किसी मां की ममता, किसी बेवा के आंसू, बच्चों की सिसकियां नहीं दिखाई देती! अगर दिखाई देतीं तो इन नौजवानो पर इतना आत्याचार ना होता और वह अपने परिवार के साथ खुशी खुशी रह रहे होते!

हालांकि चुनावों से पहले सपा सरकार ने आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को रिहा करने का वादा तो किया था लेकिन वो कभी पूरा नहीं हुआ! यदि पूरा हुआ होता तो तारिक कासमी आज जेल से बाहर होते! सपा सरकार ने साम्प्रदायिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत देने वाले निमेष कमीशन पर जानबूझ कर कार्रावई नहीं की ताकि उसे तारिक और खालिद जैसे बेगुनाह मुस्लिम युवकों को आतंकी बताकर पकड़ने की खुली छूट मिली रहे!

गौर करने वाली बात यह है की हर पार्टी में युवाओं को मंच प्रदान करने वाली पार्टीयों के पास युवा एजेंडे में तारिक कासमी और नजीब जैसे मुस्लिम युवा नहीं हैं! कारण सब जानते है लेकिन लब खोलने को कोई तैयार नहीं है!

अंजुम कुरैशी

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