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आरकॉम ने एयरसेल के साथ किया सबसे बड़ा मर्जर, जानें 10 बड़ी बातें

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देश की एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी आरकॉम ने एयरसेल के साथ मर्जर कर लिया है। यह मर्जर रिलायंस जियो की लॉन्चिंग के ठीक 13 दिन बाद हुआ है

नई दिल्ली: देश की एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी आरकॉम ने एयरसेल के साथ मर्जर कर लिया है। आपको बता दें कि यह मर्जर रिलायंस जियो की लॉन्चिंग के ठीक 13 दिन बाद हुआ है इस मर्जर के बाद अब दोनों कंपनियों की टोटल असेट्स करीब 65 हजार करोड़ रुपए हो जाएगी। देसी दूरसंचार क्षेत्र में इसे अब तक का सबसे बड़ा सौदा माना जा रहा है। रिलायंस जियो की लॉन्चिंग के बाद इस डील के मायने काफी अहम माने जा रहे हैं, जानिए इस डील से जुड़ी 10 अहम बातें।

डील की खास बातें

मर्डेको होगा नई कंपनी का नाम

इन दोनों कंपनियों के विलय के बाद जो नई कंपनी बनेगी उसका नाम मर्डेको होगा। अब विलय के बाद यह देश की चौथी सबसे बड़ी मोबाइल फोन ऑपरेटर कंपनी बन जाएगी। सब्सक्राइबर बेस और टेलीकॉम सेक्टर में दोनों कंपनियों का रेवेन्यू बढ़ेगा।

बराबर की हिस्सेदारी और बराबर का प्रतिनिधित्व

मर्जर के बाद बनी नई कंपनी मर्डेको में इन दोनों ही कंपनियों की 50-50 फीसदी की बराबर की हिस्सेदारी होगी। वहीं बोर्ड और कमेटियों में भी दोनों का बराबरी से प्रतिनिधित्व होगा।

घटेगा दोनों कंपनियों का कर्ज

इस मर्जर के बाद दोनों ही कंपनियों को फायदा होगा। जहां आरकॉम का कर्ज जहां 20 हजार करोड़ घटेगा (40 फीसदी) तो वही एयरसेल का कर्ज 4000 करोड़ रुपए तक घट जाएगा।

कंपनी की नेटवर्थ और पोर्टफोलियो

इस बड़ी डील के बाद कंपनी की कुल असेट्स 65 हजार करोड़ रुपए और नेट वर्थ 35 हजार करोड़ रुपए हो जाएगी। वहीं अगर पोर्टफोलियो की बात की जाए तो मर्डेको के पास 850,900,2100 मेगाहर्ट्ज बैंड्स में 2जी, 3जी और 4जी के आपरेशन के साथ एक बहुत बड़ा स्पेक्ट्रम पोर्टफोलियो होगा।

होगा दोनों ब्रांड को फायदा

इस डील से दोनों कंपनियों के ब्रांड को फायदा होगा। यानी मर्जर की वजह से आरकॉम और एयरसेल दोनों की रीब्रांडिंग होगी। जानकारी के मुताबिक यह सौदा 2017 तक पूरा होने की उम्मीद है।

मर्जर से बढ़ेगा रेवेन्यू मार्केट शेयर

आपको बता दें कि नवंबर साल 2015 में एमटीएस और आरकॉम के बीच ऑपरेशंस को लेकर मर्जर हुआ था। वहीं इस साल आरकॉम और एयरसेल के मर्जर से दोनों कंपनियों का रेवेन्यू मार्केट शेयर 13 से 14 फीसदी तक हो जाएगा।

टेलीकॉम कंपनियो में नंबर तीन की कुर्सी के लिए लड़ाई

यानी अब सीधी लड़ाई टेलीकॉम कंपनियों की तीसरी नंबर की कुर्सी की है। आइडिया के पास 17 फीसदी का रेवेन्यू मार्केट शेयर है और वो फिलहाल देश की तीसरे नंबर की टेलीकॉम कंपनी है।
भारतीय एयरटेल 25.1 करोड़ सब्सक्राइबर्स के साथ पहले नंबर पर काबिज है, वहीं 19.8 करोड़ सब्सक्राइबर्स के साथ वोडाफोन दूसरे नंबर पर जमा हुआ है। तीसरा नंबर आता है आइडिया का जिसके 17.5 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं।
अगर आरकॉम की बात करें तो उसके पास 11 करोड़ और एयरसेल के पास 8.4 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं, यानी दोनों कंपनियों के मर्जर के बाद 18 से 19 करोड़ का सब्सक्राइबर्स बेस तैयार हो जाएगा। यानी तीसरे नंबर की कुर्सी पर काबिज आइडिया के लिए मुश्किल खड़ी होनी तय है।

आरकॉम के पास क्या बचा रहेगा

इस मर्जर के बाद भी आरकॉम घरेलू और वैश्विक एंटरप्राइज स्पेस, डेटा सेंटर, ऑप्टिक फाइबर और दूरसंचार बुनियादी ढांचा से संबंधित कारोबार को पहले की ही तरह चलाती रहेगी और साथ ही कीमती रियल एस्टेट की कमान भी उसके हाथ में ही रहेगी।

नई कंपनी नहीं लेगी ज्यादा कर्ज

आरकॉम और एयरसेल दोनों ने विलय से बनने वाली नई कंपनी मर्डेको 28,000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज नहीं रखेगी। अब दोनों कंपनियों का 14-14 हजार करोड़ रुपए का कर्ज का भार नई कंपनी पर आ जाएगा।

स्वतंत्र पेशेवर कर सकते हैं नई कंपनी का संचालन

जानकारी के मुताबिक नई कंपनी की लीडरशिप और प्रबंधन टीम को लेकर स्थिति साफ नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि नई कंपनी का संचालन स्वतंत्र पेशेवरों की टीम द्वारा बोर्ड की निगरानी में किया जा सकता है।

 

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