कोर्ट ने कहा भारत सरकार है या पंचायत, लोकपाल पर पूछे केंद्र...

कोर्ट ने कहा भारत सरकार है या पंचायत, लोकपाल पर पूछे केंद्र सरकार से सवाल

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लोकपाल बिल 2014 में नियुक्त हुआ था परंतु आज तक लागू नहीं हुआ इस पर कोर्ट और केेंद्र सरकार में तनातनी चल रही है! केंद्र सरकार को फटकार लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट ने फिर नरेंद्र मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया! अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से केंद्रीय मंत्री का नाम बताने को कहाए जो अदालत के मुताबिकए दिव्‍यांगों कल्‍याण की फाइलों पर बैठे हुए हैं! इस पर जब सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि सरकार ने दिव्‍यांगों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैंए तो चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्‍यक्षता वाली बेंच ने नाम पूछना तब तक बंद नहीं कियाए जब तक कुमार ने जवाब नहीं दिया!

उन्‍होंने कहाए मंत्री का नाम थावर चंद गहलोत है! बेंच ने पूछा कि क्या सरकार पंचायत की तरक काम कर रही है! गहलोत केंद्रीय सामाजिक न्‍याय और सशक्तिकरण मंत्री है! यह एक अनोखा वाक्या था जब सुप्रीम कोर्ट ने किसी कानून अधिकारी ने कैबिनेट मंत्री का नाम लेने को कहा हो! आमतौर परए अगर अदालत अपने निर्देशों के क्रियान्‍वयन या किसी विशेष वर्ग के कल्‍याण के लिए बने कानून की कार्यप्रणाली से असंतुष्‍ट होती हैए तो यह उससे जुड़े अधिकारियों के नाम मांगती है और उन्‍हें समन करती है!

p-m-modi

कार्यवाही के दौरान अदालत ने पूछा कि संबंधित केंद्रीय मंत्री कौन हैघ् इस पर कुमार ने कहा कि बैठक इसलिए नहीं हो पाई क्‍योंकि एनडीए सरकार ने 2014 मेंराइट्स ऑफ पर्संस विद डिसएबिलिटी बिल पेश किया थाए लेकिन बेंच ने मंत्री का नाम जानने पर जोर दिया! कुमार ने इस पर जोर देते हुए कि आखिरी बैठक 2012 को बुलाई गई थीए कहा कि पिछली सरकार के काल में भी ऐसी कोई बैठक नहीं बुलाई गई! इस पर बेंच ने कहाए पिछली सरकार ने नहीं कियाए ठीक है मगर आप कहते हैं कि यह सरकार अलग है! फाइलों पर बैठा हुआ माननीय मंत्री कौन हैघ् बताइए ये कौन मंत्री है जो फाइलों पर बैठा रहता है! अदालत ने आगे कहाए यह भारत सरकार है या कोई पंचायतघ् भारत सरकार सोचती है कि वर्तमान कानून को बदलने के लिए एक बिल काफी है। यह मंजूर नहीं है कि पिछले चार साल में कोई बैठक नहीं हुई! ऐसा लगता है कि कानून या भ‍ियान को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया गया। क्‍या सरकार इसी तरह काम करती है!
दिव्‍यांगों को विकास के लिए एकसमान उपलब्‍धता और समान अवसर देने के लिए दायर की गई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई गुरुवार को शुरू हुई थी! सॉलिसिटर जनरल ने वर्तमान सरकार द्वारा उठाए गए कदम गिनाएए जिनमें दिसंबर 2015 में एक्‍सेसिबल इंडिया कैंपेन के लॉन्‍च की बात भी शामिल थी! इस अभियान के तहत जुलाई 2018 तक राष्‍ट्रीय राजधानी और राष्‍ट्रीय राजधानियों की कम से कम 50 सरकारी इमारतों को दिव्‍यांगों के लिए पूरी तरह उपभोग लायक बनाया जाएगा! इस पर बेंच ने पूछा कि एनडीए सरकार के दो साल के शासनकाल में विकलांग कानून के तहत केंद्रीय संयोजन कमेटी की कोई बैठक क्‍यों नहीं बुलाई गई!

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