आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता

आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता

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‘‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’’ यह पंक्ति हमने कई बार सुनी है परंतु इसको मानते बहुत कम लोग हैं! दुनिया के किसी भी हिस्से में कोई भी घटना घटित हो, आतंकवादी द्वारा घटना को अंजाम दिया गया हो या फिर किसी अन्य तत्व द्वारा पर उसका पर्यावाची नाम मुसलमानों को ही दिया जाता है! लेकिन शायद उनकों यह नहीं पता अगर मुस्लिम धर्म नहीं होता तो क्या होता है! इस्लाम ने धर्म के साथ साथ और भी कई चीज़ों का ज्ञान दिया है! जिसे आज सारी दुनिया फायदा उठा रही है! लेकिन उनकों यह अंदाज़ा नहीं है की इसकी शुरुआत इस्लाम के साथ हुई!

दुनिया में कहीं भी कोई भी आतंकी हमला होने पर मुस्लिम लोगों को शक की निगाहों से देखना शुरू कर देते हैं! अमेरिका में ऐयरपोर्ट पर तो मुसलमानों की चैकिंग करने में घण्टों लगा दिये जाते हैं! इसका उदाहरण स्वयं किंग खान है! शाहरुख खान जब अमेरिका गए तो उनके साथ कुछ ऐसा ही बर्ताव किया गया! जिसे सुनकर भारत में सनसनी फैल गई थी! इसके अलावा अभी हाल ही में अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे रिपब्लिकन कैंडिडेट डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी रैलियों में कई बार मुसलमानों को खतरा बताया है! अपने भाषणों में उन्होंने अमेरिका में मुसलमानों के घुसने पर बैन लगाने की वकालत भी की है!

2015 में हुए पैरिस अटैक के बाद वहां रह रहे मुसलमानों पर सवाल उठे! आतंकी संगठन आईएस के हर हमले के बाद मुस्लिम विरोधी संगठन उभर आते हैं! हालांकिए इसको रोकने के लिए कई लोग एवं कई संगठन आगे आए! उनमें से एक न्यूयार्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और राजनीतिक चिंतक इएन ब्रीमर भी थे! उन्होंने बताया था कि आईस में शामिल आतंकियों में मुसलमानों की संख्या कुल 0.00625 प्रतिशत है!

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