काले धन पर रोक या काली मुद्रा पर ?

काले धन पर रोक या काली मुद्रा पर ?

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पीएम मोदी ने रातों रात एक बड़ा फैसला लिया जिसके अनुसार बड़े नोट बंद करवा दिए१ सबको लग रहा है ये फैसला काले धन को लेकर किया गया पर समीक्षकों का कहना है ये काली मुद्रा पर लिया गया फैसला ज़्यादा दिखाई देता है! ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ का कहना है कि 9 नवंबर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एलान ‘काली मुद्रा’ के ख़िलाफ़ था न कि ‘काले धन’ के ख़िलाफ़.’ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ काम करने वाली अंतराष्ट्रीय संस्था है और रामनाथ झा उसकी भारतीय शाखा के अध्यक्ष हैं!

रामनाथ झा कहते हैं, “ब्लैक मनी वो धन है जिसपर सरकार को टैक्स ना दिया गया हो. या, फिर ये ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से एकत्रित किया गया हो. ये नोटों की शक्ल में हो सकता है, प्रॉपर्टी की शक्ल में, या फिर, आभूषण की सूरत में हो सकता है या फिर बेनामी सौदों की आड़ में! ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ का मानना है कि इसलिए मोदी सरकार ने जो फ़ैसला किया है उसका प्रहार केवल मार्केट में मौजूद नक़दी नोटों पर है! रामनाथ झा का कहना है, मोदी सरकार के इस क़दम से मार्केट में उपस्थित नोटों को धक्का लगेगा, काले धन को शायद नहीं!

उनके अनुसार सरकार ने एक तरफ़ काले मुद्रे या नोटों को निशाना बनाया है तो दूसरी तरफ़ 2000 रुपये का नोट जारी करके इसे काफ़ी हद तक नकार भी दिया है. 2000 का नोट लाने का फ़ैसला आश्चर्यजनक है. दस से पंद्रह सालों में बाज़ार में ‘काली मुद्रा’ एक बार फिर से आ जाएगी.”रामनाथ झा के अनुसार मोदी सरकार का ये फ़ैसला ऐतिहासिक ज़रूर है, जिसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत थी, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था से अघोषित पैसा ख़त्म करने के लिए कई और क़दम उठाने पड़ेंगे!

उनका मानना है कि काली मुद्रा’ पर अंकुश लगाने के लिए ऑनलाइन या प्लास्टिक कार्ड से होने वाले कैश के बग़ैर ट्रांज़ैक्शन को बढ़ावा देना चाहिए! इ-कॉमर्स का प्रोत्साहन होना चाहिए! कैशलेस धंधे को पूरी तरह से प्रोत्साहित करना होगा जिसके लिए सरकार को इंसेंटिव देना चाहिए! उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी वेबसाइट्स पर होनेवाले ट्रांज़ैक्शन पर सरचार्ज लेना बंद हो जाए तो इससे लोगों को फ़ायदा होगा! भारत के निजी सेक्टर में, ख़ासतौर से सेवा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार आम है! इस पर अंकुश लगाने के लिए सख़्त भ्रष्टाचार विरोधी क़ानून लाने की ज़रूरत है! ब्रिटेन का भ्रष्टाचार विरोधी क़ानून दुनिया के सबसे कड़े क़ानूनों में से एक है! भारत को इसी तरह के क़ानून की ज़रूरत है!

झा कहते हैं कि काले धन में बेनामी संपत्ति शामिल है जिसपर रोक लगाना ज़रूरी है! उनका कहना है कि काली मुद्रा के साथ काले धन को निशाना बनाना ज़रूरी है! संपत्ति ख़रीदनते समय कैश की डिमांड होती है और लोग इसे देने को मजबूर हैं जिसपर रोक लगाना ज़रूरी है और जिसके लिए राजस्व प्रशासन में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर ज़ोर देना होगा!

सिंगापुर में दो साल पहले बड़े नोटों को सिस्टम से हटाया गया था. ये क़दम काफी कामयाब रहा! उसकी ख़ास वजह रही सिंगापुर सरकार के आर्थिक सुधार के कई और क़दम जिनमें टैक्स और बैंकिंग क्षेत्रों में सुधार ख़ास थे! भारत के ग्रामीण इलाक़ों में बैंकों की शाखाएं खुलनी चाहिए, एटीएम टर्मिनल खोलने की ज़रूरत है! लेकिन इससे भी अहम ग्रामीण लोगों को बैंकिंग सिस्टम के अंदर लाया जाए! लोगों के बैंक खाते खुले हैं लेकिन उन्हें बैंकिंग की जानकारी कम है, वो क्रेडिट और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल की समझ कम रखते हैं! फिलहाल भारत में इनकम टैक्स देने वालों की संख्या कुल आबादी का केवल दो प्रतिशत है! यानी तीन-चार करोड़ लोग ही इनकम टैक्स देते हैं! ज़रूरत इस बात की है कि अधिक से अधिक लोगों को टैक्स के दायरे में लाया जाए! इसके इलावा ये तय होना चाहिए कि एक आदमी कितनी निश्चित राशि रख सकता है!

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