सबका साथ सबका विकास नारे को हकीकत में तब्दील करना है तो...

सबका साथ सबका विकास नारे को हकीकत में तब्दील करना है तो मुस्लिमों को अपने हक मांगने होंगे – हामिद अंसारी

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भारत में अल्पसंख्यकों को कुछ अधिकार व सुविधाऐं तो दिये है पर यह सुविधाऐं उनतक पहुंच नहीं पाते जिसके कारण अल्पसंख्यक समुदाय बजाए तरक्की करने के पिछड़ते जा रहे है। समाजिक विकास सूचकांक पर अन्य समुदायों के मुकाबले मुसलिमों के पिछड़ने पर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने चिंता जताई है। हामिद अंसारी ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में मुस्लिमों की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथए सबका विकास नारे को हकीकत में तब्दील करना है।

अंसारी यहां एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे जिसमें अल्पसंख्यकों के सशक्तीकरण में शिक्षा कैसे मददगार साबित हो सकती हैए इस पर चर्चा की गई। मुस्लिमों को अब गुहार लगाना छोड़ना होगा। इनके पास सरकार से मांगने का कानूनी हक है लेकिन अफसोस ये है कि अल्पसंख्यकों को कई बार उनके दायित्वों और जिम्मेदारियों की याद दिलाने की जरूरत पड़ती है।

देश का नागरिक होने के नाते मुसलमानों के भी उतने ही हक हैंए जितने अन्य नागरिकों को हासिल हैं। यदि हुकूमत उन्हें उनके हक देने में कोताही करती है या देरी करती है तो वह अपनी आवाज उसके सामने उठा सकते हैं

इस संबंध में उन्होंने उत्तर प्रदेश के इटावा में सवा सौ साल पुराने एक इस्लामी कॉलेज के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बातचीत करने पर उन्हें पता लगा कि मुसलमान सातवीं.आठवीं कक्षा की पढ़ाई के बाद अपने बच्चों को यह कहकर काम में लगा देते हैं कि वे घर में हाथ बटाएं। कोई 10 गज पीछे है तो मुकाबला नहीं कर सकता। सबको एक लाइन पर लीजिए तब मुल्क तरक्की करेगा। यह एक महान राष्ट्र है और आगे समृद्ध होगा।

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