एक सलाम दानिश खान के नाम

एक सलाम दानिश खान के नाम

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                                   मत पूछ मुझसे की मेरा मज़हब क्या है ?
                                   में तिरंगे में लिपटा आया हूँ देश के लिए……… 
बात बात पर मुसलमानों से देश भक्ति का सर्टिफिकेट मांगने वालों की ज़ुबान पर आज ताले है! जो लोग कहते है कि ’’भारत मां की जय’’ नहीं बोलोगे तो गद्दार कहलाओगे! जो ’’भारत भाग्य विधाता’’ नहीं बोलेगा उसको भारत में रहने का अधिकार नहीं है! और जो ’’वन्दे मातरम’’ का नारा नहीं लगाएगा उसका सर काट दीया जाएगा! आज वही निशब्द है उनकों निशब्द करने वाला कोई और नहीं बल्कि भारतीय मुसलिम नौजवान रज़ीजुद्दीन खान दानिश है जिसने पाकिस्तान के साथ फायरिंग में अपने सीने पर गोली खाई और उन तमाम लोगों को बता दिया की मज़हब देशभक्ति की परिभाषा नहीं बदल सकता!

आजमगढ़ का लाल कमांडर रज़ीजुद्दीन खान दानिश की शादी को अभी एक साल भी पूरा नहीं बीता था।इसी साल 26 फरवरी को अपनी जिम्मेदारी पर एक बाप की बेटी को निकाह (शादी ) करके लाया था। देश की जिम्मेदारी की कसमें खाकर लौटा रज़ीजुद्दीन उर्फ दानिश को क्या पता था कि इतने कम समय में उसे इस मिट्टी की हिफाजत करते हुए शहीद होना पड़ेगा! सिर्फ यही नहीं दानिश ने अपनी शादी से पहले अपनी बहन की भी शादी की। 24 फरवरी को बहन की डोली खुशी खुशी अपने घर से रुकसत कर दी। फिर अपने घर आंगन को रोशन करने के लिए अपनी शादी की।

दानिश खान ने अपने कर्तव्य और देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी जान गंवा दी! जिस आंगन को 9 महिने पहले खुशी मिली थी वह आंगन आज ग़म में बैचेन है। कंमाडर दानिश देश की मिट्टी की हिफाजत करने में शहीद हो गए। मां-बाप का लाल दुश्मनों की गोलियों का शिकार हो गया। आसपास दूर-दूर तक सन्नाटा पसर गया।
लेकिन हैरानी  की बात  ये है की सरकार के इशारे  पर नाचने  वाली मिडिया, और हिंदुस्तान के मुसलामानों को पाकिस्तान भेजने की बात कहने वाले लोगों ने चुप्पी साध रखी है! सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ख़ामोशी छायी है! सिर्फ इसलिए की जो शहीद हुआ वो मुसलमान है! दानिश की तिरंगे में लिपटी हुयी लाश आज इन्साफ मांग रही है की  मेरी शहादत को धर्म के पलड़े में मत तोलो! मिडिया टुडे शहीद कमांडर रज़ीजुद्दीन खान दानिश की शहादत को दिल से सलाम करता है!
अंजुम

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