आरएसएस संगठन देश की सुरक्षा के लिए खतरा इससे संबंधित संगठनों पर...

आरएसएस संगठन देश की सुरक्षा के लिए खतरा इससे संबंधित संगठनों पर लगना चाहिए बैन

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आरएसएस एक ऐसा संगठन बनता जा रहा है जिसने कानून को अपने हाथ में रखने का ठेका ले रखा है। जिसके चलते राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में आरएसएस और इससे संबंधित संगठनों के खिलाफ याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका का अध्ययन करने के लिए सुनवाई को 17 जनवरी तक टाल दिया है।

मामले में याचिका दाखिल करते हुए मोहाली के एडवोकेट हरबिंदर सिंह वैदवान ने कहा कि आरएसएस के एजेंडेा के चलते पंजाब में किसानों के साथ लूट हो रही है। आरएसएस को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर इसे और इससे संबंधित संगठनों को बैन किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने आरएसएस के खिलाफ दलीलें दी है की आरएसएस मनुस्मृति का अनुसरण करता है जो वर्ण व्यवस्था का समर्थन करने वाली है। भारत के संविधान निर्माताओं ने इस व्यवस्था को देश हित के लिए खतरा मानते हुए इसे संविधान में शामिल करने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ विचारधारा होना अपने आप में ही देश के लिए खतरा है। हाईकोर्ट के सामने दलील देते हुए कहा गया है कि यदि इसे नहीं रोका गया तो जो यूपी और गुजरात में हुआ वही पंजाब में भी दोहराया जाएगा।

भारत में सिखों और मुस्लिमों के साथ क्या होगा यह बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि आरएसएस हिंदू राष्ट्र की बात करता है। किसी को अपने धर्म को प्रचारित करने का अधिकार है

उसमें लिबराहन आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आयोग ने अयोध्या मामले में दी गई रिपोर्ट में गैर संवैधानिक करार दिया था। इस बात को केंद्र ने नहीं माना था। अब पंजाब के कंसोलिडेशन एक्ट को संशोधित कर इसमें सेक्शन 42ए शामिल किया गया हैए जो बिल्कुल गलत है। यह सीधे तौर पर आरएसएस की सोच का नतीजा है।

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