वोटों की राजनीती या एनकाउंटर

वोटों की राजनीती या एनकाउंटर

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भोपाल के पास सोमवार सुबह  जेल से कथित तौर पर फ़रार हुए स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) के आठ सदस्यों के मारे जाने पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं! इससे पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक पर ऐसे ही सवाल उठाये गए थे! यदि हम इन मामलों की ध्यानपूर्वक मंत्रणा करें तो इन आरोपों में भी सच्चाई दिखाई देगी! क्योंकि सरकार कुछ कहती है और तथ्य किसी और तरफ इशारा!

सिमी के 8 कार्यकरता मारे गए जिस पर विपक्ष ने मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस के दावों पर सवाल उठाए हैं! और सवाल उठाना भी सही है क्योंकि पहले भी ऐसे केस हो चुके हैं जिसकी वजह से प्रशासन पर उँगलियाँ उठीं है!

जैसे खंडवा जेल से फ़रार हो जाने की घटना से सरकार ने कोई सबक क्यों नही लिया? हाई अलर्ट के दौरान 35 आतंकवादियों को रखे जाने वाली जेल की सुरक्षा मात्र 2 सिपाहियों के भरोसे क्यों, कैसे और किस लिए रखी गई? जेल से फ़रार होने के बाद आतंकवादियों ने 8 से 9 घंटे तक भोपाल के ही नज़दीक रहने का निश्चय क्यों किया? प्रदेश की सीमा से बाहर भागने के लिए 8 से 9 घंटे पूर्णतः पर्याप्त नहीं होते क्या ? फ़रार हुए लोगों को आधुनिकतम हथियार कहाँ से और किससे प्राप्त हुए? ये बयान स्वयं भोपाल के आईजी ने दिया जो कई रहस्य और आशंकाओं को जन्म दे रहा है! इस घटना और गहरे षड्यंत्र के नेपथ्य में कौन कौन सी आंतरिक शक्तियां शामिल हैं? भोपाल के केंद्रीय कारागार देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक है!

अब यदि इन सब बुनयादी बातों पर नज़र दौड़ाई जाये तो ये राजनीती स्टंट के आलावा और कुछ नही लग रहा है! क्योंकि कई राज्यों के चुनाव भी नज़दीक है अब जीतने के लिए कोई न कोई मुद्दा तो होना चाहिए जिससे वोट बैंक को बढ़ाया जा सके! इस एन्काउंटर पर कोई पार्टी सवाल उठती है तो बीजेपी इलज़ाम लगाती है की ये सवाल सेना या पुलिस के पराक्रम पर उठे हैं! पर उनको कोन समझाये  ये सेना के पराक्रम पर नहीं बल्कि राजनितिक फायदे के लिए बार बार सेना का नाम इस्तेमाल करने के लिए उठाये जाते है!

मोदी जी ने स्वयं कहा था ” सेना बोलती नहीं पराक्रम दिखती है” पर आप क्या कर रहे हैं ? अपने फायदे के लिए सेना या पुलिस का सहारा लेना ये भारत के प्रधानमंत्री को शोभा नही देता! ये स्वच्छ राजनीती का हिस्सा कभी नहीं हो सकता!

ये फ़र्ज़ी मुठभेड़ कुछ और नहीं बल्कि इशरत जहाँ जैसे कई बेगुनाह पैदा कर रही है! जिनके परिवार वाले आज तक इसलिए अदलतों के चक्कर काट रहे है की उनके बच्चे आतंकवादी नहीं है! शायद मोदी जी के अच्छे दिन यहीं है की मुस्लिम मासूम नोज़वानों  को सिर्फ शक के बिना पर गिरफ्तार कर उनकी ज़िन्दगी के कई साल बर्बाद कर दिए जाएँ इस पर कोई सवाल भी नहीं उठा सकता क्योंकि ये सबसे बड़ा लोकतंत्र शायद तालिबानी शासन की मानसिकता अपना रहा है!

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