नोटबंदी का फैसला सरकार की मुसीबत

नोटबंदी का फैसला सरकार की मुसीबत

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प्रधान मंत्री मोदी ने अपने प्रयासों से कालाधन व भ्रष्टाचार को मिटाने की कोशिश की है परंतु इसके नाकारात्मक प्रयास सामने आ रहैं है! नोटबंदी से कालाधन वापस अर्थव्यवस्था में आ जाए इसमें थोड़ी कामयाबी भी मिली और टैक्स भी फर्क पड़ा है! लेकिन जो काला पैसा नेताओं और अफसरों के पास जमा थाए वो पैसा सरकार नहीं निकलवा सकी! इस सर्जिकल स्ट्राइक से पैसा नष्ट हो गया है! पैसे के नष्ट होते ही उस पैसे से अर्थव्यवस्था को मिल रहा सपोर्ट ख़त्म हो गया अब मंदी का दौर शुरू हो जाने की आशंका है!
ध्यान देने वाली बात यह है की सारा खेल लोगों के माइंड सेट का है! दो विचार अब देश में चलेंगे कुछ मोदी की आलोचना करेंगेए कुछ मोदी का समर्थन करेंगे! काले धन की समानांतर चलती अर्थव्यवस्था दरअसल भारतीयों की सोच से पैदा होती है!
भारत में आमतौर पर आदमी सिर्फ दो मौकों के लिए पैसा जुगाड़ता हैए एक तो मकानए दूसरा शादी! इन दोनों में खर्च किया गया रुपया वापस अर्थव्यवस्था में लौट आता है क्योंकि यह पैसा हाथ बदलता है और इस पैसे से रोज़गार पैदा होते हैं! गोरतलब हे फूल वालेए घोड़ी वालेए टेंटए जेवरए कपड़ेए मिस्त्रीए खातीए मज़दूरए प्लम्बरए इलेक्ट्रीशियन सब को रोज़गार मिलता है और यह रोज़गार ही थाए जिसने महामंदी के दौर में भी भारत के लिए संकट खड़ा नहीं होने दिया! लेकिन इससे सरकार को टैक्स नहीं मिलता! न ही सरकार को इससे कोई फायदा है!
शराब इलेक्शन दौरान काफी अहमियत रखती है! फरीदाबाद में लोकसभा इलेक्शन के दौरान इलेक्शन कमीशन की सारी सख्ती का तोड़ एक नेता जी ने निकालाए 5 रुपए के नोट ;सिक्के नहींद्ध बांटे गए! दरअसल यह नोट टोकन थाए जिसे शराब के ठेके पर देने पर एक बोतल शराब मिलती थी। बाद में नेता जी टोकन गिन कर भुगतान कर देते थे!
यदि शराब नहीं बंटेगी तो उसका ठीकरा मोदी पर ही फूटेगा! ऐसे मोदी के खिलाफ भाषण चुनाव में सुनने को मिल सकते हैं! हिंदुस्तान जहां 75 फीसदी आबादी महज़ 20 रुपया रोज़ पर गुज़ारा करती हैए वहां 500 रुपया प्रति वोट बड़ी डील होती है। मोदी ने उनके आनंद में खलल पैदा की है। मैं मानता हूं कि लक्ष्मी न् ब्लैक होती है न् वाइटए वह गुलाबी होती है। गुलाबी सपने दिखाने वालीए शायद इसीलिए इस बार गुलाबी नोट और बड़ा है ए 2000 का!

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