या तो बुर्का पहनों या फिर राष्ट्रगाान गाओ

या तो बुर्का पहनों या फिर राष्ट्रगाान गाओ

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या तो बुर्का पहनों या फिर राष्ट्रगाान गाओ

“या तो बुर्का पहनों या फिर राष्ट्रगाान गाओ” यह सोच है मुंबई में स्थित एक इंग्लिश स्कूल के संचालन विभाग की! भारत में मुस्लिम समुदाय को कदम कदम पर अपनी देशभक्ति का सबूत देना पड़ता है! ताजा मामला है मुंबई के कुर्ला स्थित विवेक इंग्लिश स्कूल का जहां 25 वर्षीय खान शबीना नाज़नीन को स्कूल की संचालिका ने स्कूल परिसर में हिजाब और बुर्का पहनकर आने से मना किया था!

“स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात लगाया जा सकता है नाज़नीन को 5 दिसंबर को इस्तीफ़ा देने को मजबूर होना पड़ा”

इस सब पर नाज़नीन का कहना है कि वो पिछले दो साल से कुर्ला स्थित विवेक इंग्लिश स्कूल में एक आईसीटी टीचर के तौर पर इस पढ़ा रही थीं! लेकिन जब जून महीने में नई स्कूल संचालिका ने पदभार संभाला तब से उनको हिजाब पहनने को लेकर परेशान किया जाने लगा! नई संचालिका के आने के बाद मुझसे लगातार हिजाब और बुर्क़ा उतारने को कहा गया कि यह स्कूल की मर्यादा के खिलाफ़ है!

नाज़नीन ने बताया की “उस दिन मॉर्निंग सभा में प्रार्थना करने और राष्ट्रगान गाने की बारी मेरी थी! मुझे मेरा बुर्का हटाने के लिए मजबूर किया गया! जब मैंने ऐसा करने से इंकार किया तो संचालिका ने कहा कि मैं बुर्का पहनकर राष्ट्रगान नहीं गा सकती!”

इस सब पर स्कूल के प्रिंसिपल विक्रम पिल्लई ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा ष्उनके यहां इस तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जाता हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि नई संचालिका के आने के बाद नए नियमों को लागू किये गए थे!’’

फिलहाल नाज़नीन के इस्तीफ़े को प्रबंधन के पास भेज दिया गया है! प्रबंधन ने इस मामले की सुनवाई करेगा और नाज़नीन की शिकायत सुनेगा!

यह मामला कोई पहली घटना नहीं है ऐसी घटनाऐं अक्सर सुनने को मिलती हैं! तीन तलाक एवं मुस्लिम महिलाओं के अधिकार दिलाने वाले लोग इन मुद्दों को लेकर चुप्पी क्यों साध लेते है! नाज़नीन और उन जैसे देशभक्त मुसलमानों की आंखे देश के संविधान और न्यायपालिका पर टिकी हैं की कब वो दिन आऐगा जब हिजाब और टॉपी पहनकर उन्हें राष्ट्रगान गाने का मौका मिलेगा!

अंजुम कुरैशी

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