बाबरी मस्जिद विवाद पर बोले डॉ. सूरजभान, पहले भी विवादित स्थल पर...

बाबरी मस्जिद विवाद पर बोले डॉ. सूरजभान, पहले भी विवादित स्थल पर थी मस्जिद

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भारत में बाबरी मस्जिद विवाद ने बहुत तूल पकड़ा था और देश दो भागों में बंट गया था आज भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक रोटियां सेकीं जाती है। गोरतलब है कि उच्च न्यायालय ने यह तय किया कि विवादित स्थल पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से खुदाई कराई जाए।

1528 में बाबरी मस्जिद के बनाए जाने से पहलेए वहां कोई हिंदू मंदिर था या नहीं? हालांकि दोनों पक्षों के गवाहों से काफी मात्रा में साक्ष्य दर्ज कराए जा चुके थे लेकिन न्यायलय के आदेश पालन एक बार फिर करना पड़ा।
इस खुदाई के लिए आदेश जारी करने से पहले अदालत ने संबंधित स्थल का भू-भौतिकी सर्वेक्षण भी कराया था। उक्त सर्वेक्षण की रिपोर्ट में संबंधित स्थल पर सतह के नीचे भूमिगत असंगतियां दर्ज की गयीं थीं। इस रिपोर्ट के ही अंशों में से असंगंतियां प्राचीन या समकालीन निर्माणों जैसे खंभोंए नींव की दीवारोंए संबंधित स्थल के बड़े हिस्स् में फैले पत्थर के फर्श से संबंद्ध हो सकती थीं

इसके हिसाब से अयोध्या में रामजन्मभूमि कहलाने वाले स्थल को सबसे पहले 600 ईस्वीपूर्व आबाद किया गया था। लेकिनए इसके बादए कुषाण काल के आखिरी दौर में या गुप्त काल मेंए पांचवी सदी ईस्वी तक यह इलाका उजड़ चुका था। अब स्पष्ट हो गया है कि सल्तनत काल (13 वीं सदी ईस्वी) पहले के नहीं हो सकते हैं। जो भी नक्काशीदार काले पत्थर के खंभोंए दरवाजे के कब्जे व अन्य नक्काशीदार पत्थरए विवादित स्थल पर या उसके निकट मिले थेए जिसके संबंध में हिस्टोरियन्स फोरम ने न्यू आर्कियोलोजिकल डिस्कवरीज (1992) में बताया था या जिनके मस्जिद के मलबे से मिलने के बारे में बताया गया था उनका बाबरी मस्जिद के नीचे के संस्तरों से कोई भूसंस्तरीय संबंध नहीं बनता है।

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