मिडिया की मत करो हत्या

मिडिया की मत करो हत्या

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भारत को दुनिया का सबसे का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का सम्मान प्राप्त है! इसका एक महत्वपूर्ण कारण है की मिडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ मन जाता है! मिडिया सच का आईना है वो भावनाओं को शब्द देकर दर्शकों के सामने प्रस्तुत कती है! एनडी टीवी पर एक दिन के प्रसारण पर लगायी जाने वाली रोक ने कई सन्देह को जन्म दिया है! और  सुचना एवं प्रसारण मंत्रालय की तरफ की साख पर भी कई सवाल उठना शुरू हो गया है ! जहाँ एक और एनडी टीवी ने कहा के उन्होंने किसी प्रकार के कोई भी नियमों का उलंघन नहीं किया है पर मंत्रालय ने उनके ऊपर आरोप लगाया है की उन्होंने ऐसे नियमों का उलंघन किया है जिससे देश की सुरक्षा को लेकर खतरा हो सकता है ! कुछ  का कहना है की एनडी टीवी इंडिया को सच बोलने की सजा मिली है और सरकार का ये रवैया बहुत अनैतिक है !

मांग क्या था पूरा मामला

मंत्रालय ने आरोप लगाया है की जिस वक़्त पठानकोट में एयर बेस पर आतंकी हमला हो रहा था! तब अपनी रिपोर्ट में चेनल ने बताया ” हथियारों के अलावा एम जी आई फायर प्लेन, रॉकेट लॉन्चर, हैलीकॉप्टर और फ्यूलटैंक भी है!” मंत्रालय ने इस प्रकार की खबर को देश की सुरक्षा के विरुद्ध बताया!

बीईए और एडिटर्स गिल्ड ने की बैन वापस लेने की मांग

अब बीईए ( ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन) और  एडिटर्स गिल्ड ने सूचना प्रसारण मंत्रालय की तरफ से एनडीटीवी पर की गई इस कार्रवाई की निंदा की है! बीईए और एडिटर्स गिल्ड ने मंत्रालय से इस बैन को वापस लेने की भी मांग की है! वहीं बीईए ने इसे ‘बोलने की आजादी पर बैन’ करार दिया है. बता दें कि इस साल जनवरी में हुए पठानकोट आतंकवादी हमले के कवरेज को लेकर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के inter-ministerial panel ने हिंदी न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है!

केजरीवाल ने भी निकली भड़ास

इस पुरे मुद्दे पर केजरीवाल ने भी नाराज़गी जताई उन्होंने ट्विटर पर लिखा की ” मिडिया पी एम मोदी की भगवान् की जगह पूजा करे” इससे साफ़ ज़ाहिर होता है की मोदी के खिलाफ तथा मंत्रालय के इस व्यवहार से अरविंद कितने गुस्साए है !

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सरकार के इस रवैये से कई पत्रकारों ने जताई नाराज़गी केजरीवाल ने भी निकली भड़ास

कई पत्रकारों ने इस पर अपना विरोध जताया है! पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, “भारत के सबसे संयमित और ज़िम्मेदार चैनलों में से एक एनडीटीवी इंडिया को प्रसारण मंत्रालय एक दिन के लिए बंद कर रहा है! आज एनडीटीवी है, कल कौन होगा?सगारिका घोष ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी को प्रतिबंधित करना स्वतंत्र मीडिया पर सरकार का चौंकाने वाला शक्ति प्रदर्शन है. मीडिया की हत्या मत करो!”पत्रकार सिद्धार्थ वर्दराजन ने ट्वीट किया, “एनडीटीवी पर सरकार का एक दिन का प्रतिबंध सरकार की मनमानी और ताक़त का दुर्भावनापूर्ण उपयोग है!

एनडी टीवी के दंड की प्रकिया

एनडी टीवी को दण्डित करते हुए पैनल ने चैनल को 9 नवंबर को एक दिन के लिए ऑफ एयर यानी प्रसारण बंद करने की सिफारिश सरकार से की है! जिसके चलते 9 नवम्बर  हमले के दौरान चैनल ने पठानकोट एयरबेस में मौजूद लड़ाकू विमानों और हथियारों से जुड़ी ऐसी जानकारियां प्रसारित की जिनका इस्तेमाल कर आतंकवादी और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते थे!

इससे पहले भी रुकवाया गया था कवरेज

इससे पहले 2008 में मुंबई हमले के दौरान जैसे ही ये पता चला था कि पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के हैंडलर न्यूज चैनल देखकर आतंकियों को निर्देश दे रहे थे, सभी चैनलों ने लाइव कवरेज पर रोक लगा दी थी! उसके बाद से कभी भी किसी आतंकी हमले का लाइव कवरेज नहीं किया गया! ये सुरक्षा  मद्देनज़र किया गया था!

पत्रकारिता के इतिहास में पहली बार

पैनल ने हमले के दौरान एनडीटीवी इंडिया के कवरेज को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पहुंचाने वाला माना है. सूत्रों के मुताबिक चैनल को इसी साल जनवरी में एक कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था. जिसके जवाब में एनडीटीवी इंडिया की तरफ से कहा गया कि उन्होने वही जानकारियां सामने रखीं जो पहले से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक औऱ सोशल मीडिया पर मौजूद हैं.  किसी आतंकी हमले की कवरेज को लेकर पहली बार किसी चैनल पर इस तरह की कार्ऱवाई की गई है. इस पर

एनडीटीवी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है

वही एनडी टीवी ने जारी एक बयान में कहा गया है ‘’सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का आदेश प्राप्त हो चुका है! बेहद हैरानी की बात है कि एनडीटीवी को इस तरीके से चुना गया! हर चैनल और अखबार की कवरेज एक जैसी ही थी. वास्तविकता यह है कि एनडीटीवी की कवरेज विशेष रूप से संतुलित थी! आपातकाल के काले दिनों के बाद जब प्रेस को बेड़ियों से जकड़ दिया गया था, उसके बाद से एनडीटीवी पर इस तरह की कार्रवाई अपने आप में असाधारण घटना है! इसके मद्देनजर इस मामले में एनडीटीवी  सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है!’’

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मिडिया अपनी छाप हर क्षेत्र में छोड़ती है सबसे ज़्यादा राजनीती में भी मिडिया की अहम भूमिका होती है! जिसके चलते वह सरकार द्वारा किये गए कार्यों को जनता तक पहुँचती है ताकि देश की जनता के सामने सरकार की पारदर्शिता आ सके और आगे के चुनावों में भली प्रकार से अपना नेता चुन सके!  लेकिन वर्तमान युग में मिडिया पैसा कमाने का मात्र एक साधन बन गया है जिसका सच से कोई सरोकार नही है!  जिसकी “लाठी उसी की भैंस” का मामला दिखाई दे रहा हैं!

अंजुम कुरैशी

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