बाबरी मस्जिद की शहादत का दिन आज, यह काला दिवस नहीं भूल...

बाबरी मस्जिद की शहादत का दिन आज, यह काला दिवस नहीं भूल पाएगा हिंदुस्तान

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कहा जाता है कि सन् 1528 में मुगल सम्राट बाबर के सिपहसालार मीर बांकी एक मस्जिद बनवाई थी! कई साल तक इस मस्जिद को लेकर विवाद चलता रहा और आज के ही मनहुस दिन यानि 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने इस मस्जिद को ढहा द‌िया था! 6 दिसंबर 1992 का काला इतिहास आज भी लोगों के जेहन में ताज़ा है! 488 साल पुराने इतिहास को समेटे इस मुद्दे की आंच आज भी सियासत को सींच रही है! सियासत की रोटी आज भी इस इतिहास में तब्दील होने वाली मस्जिद पर सेकी जा रही है!

केंद्र में कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार थी! सुबह 11 बजे के करीब वीएचपी नेता अशोक सिंघलए बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशीए लाल कृष्ण आडवाणी बाबरी की तरफ बढ़ रहे थे! तभी पहली बार इसका बाहरी दरवाजा तोडऩे की कोशिश हुई लेकिन पुलिस ने उसे नाकाम कर दिया। सुबह साढ़े 11 बजे तक व‌िवाद‌ित स्थल सुरक्ष‌ित था! तभी वहां पीली पट्टी बांधे कारसेवकों का आत्मघाती दस्ता आ पहुंचा! कुछ ही देर में सुरक्षा में लगी पुलिस की इकलौती टुकड़ी वहां से बाहर निकल गई! उसके तुरंत बाद मेन गेट पर दूसरा और बड़ा धावा बोला गया! दोपहर के 12 बजे कारसेवकों के नारों की आवाज पूरे इलाके में गूंजती जा रही थी! कारसेवकों का एक बड़ा जत्था दीवार पर चढऩे लगा! बाड़े में लगे गेट का ताला भी तोड़ दिया गया! कारसेवकों ने अपनी हिंसात्मक प्रवृति दिखा दी और वहां कब्जा जमा ल‌िया!

आज तक इस बर्बरता की आग ठण्ड़ी नहीं हुई है! लालकृष्ण आडवाणी जिन्होने इस मस्जिद को अपनी राजनीति चमकाने का एक ज़रिया बनाया आज वही भीष्म पितामाह बीजेपी से अलग थलग पड़ें है!

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