अपने ही बिछाए जाल में फंस गई बीजेपी

अपने ही बिछाए जाल में फंस गई बीजेपी

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वन रैंक वन पेंशन को लेकर पूर्व सैनिक की आत्महत्या पर दिल्ली की सियासत बहुत ज़ोरो पर थी! लेकिन इस मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को दो दिन में तीन बार हिरासत में लिए जाने से देश का माहौल कुछ बदला गया है! अनुभवों की माने तो इस प्रकरण को देश लिए बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा हैए जो कथित तौर पर केन्द्र सरकार की विफलता का परिचायक बन सकता है! कांग्रेसी खेमा तो इस पूरे प्रकरण से बेहद उत्साहित है! उसे लगता है कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ की गई इन कार्रवाइयों से कांग्रेस का सेंसेक्स ऊपर चढ़ा है! होना भी चाहिए क्योंकि 1977 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब इंद्रिरा गांधी गिरफ्तार हुईं थीं!

सवाल यह उठ रहा है कि अपनी हिरासत के बाद चढ़े कांग्रेस के सेंसेक्स को उपाध्यक्ष राहुल गांधी यूपी चुनाव 2017 और लोकसभा चुनाव 2019 तक कायम रख पाएंगेघ् हालांकि कांग्रेसी तो दंभ भर रहे हैं कि राहुल को हिरासत में लेने की कार्रवाई से मोदी सरकार ने अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार ली है!

सोशल साइट्स पर अन्य लोग भी यह साफ शब्दों में कह रहे हैं कि केन्द्र सरकार के कथित जनविरोधी कारनामे ही कांग्रेस और राहुल गांधी की लोकप्रियता को बढ़ा रहे हैं!

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पठानकोट हमले के समय सैन्य ऑपरेशन से संबंधित संवेदनशील जानकारी दिखाए जाने पर राष्‍ट्रीय समाचार चैनल एनडीटीवी को 24 घंटे के लिए श्ऑफ एयरश् करने का आदेश भी भाजपा के खिलाफ एक माहौल तैयार कर रहा है! हालांकि इस मुद्दे को लेकर सरकार के सहयोगी दल उस तरह से मुखर नहीं दिखाई दे रहे हैंए जिस तरह से राहुल गांधी की गिरफ्तारी को लेकर वे सामने आए हैं! राहुल गांधी की गिरफ्तारी की तो भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भी आलोचना की है!

अब मोदी सरकार का नोटबंदी का फैसला भी उसके खिलाफ जाता नज़र आ रहा है क्योंकि जिस प्रकार लोंगों की जाने गईं है और दिन प्रतिदिन स्थिति और भी गम्भीर होती जा रही है! इस सबसे यह प्रतीत हो रहा है की भाजपा ने अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली है!

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