बीबीसी के रिर्पोटर का सवाल, “आपने कौन से झंडे गाड़े हैं?”

बीबीसी के रिर्पोटर का सवाल, “आपने कौन से झंडे गाड़े हैं?”

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मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानी जाती है! और इसमें भी कुछ मीडिया ग्रुप काफी प्रतिष्ठा पा चुके हैं! दुनिया के सबसे बड़े मीडिया नेटवर्क में शुमार द ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन की साख इंडिया में हिंदी के पत्रकारों की बदौलत खाक में मिल रही है! यह पत्रकार अंहकारी पत्रकार बनते जा रहें है!

हिंदी भाषा के गिरते स्तर की बानगी बीबीसी हिंदी के स्टूडियो में देखने को मिली! जब सवाल करते बीबीसी रिपोर्टर ने एक सांसद से कहा किए आपने कौन से झंडे गाडे घ् यह शब्दों को इस्तेमाल करता एक प्रतिष्ठित मीडिया ब्रांड का रिपोर्टर है! जो अपने यहां आए एक जनता के प्रतिनिधि से निचले पायदान वाली भाषा का इस्तेमाल बातचीत के दौरान करता है!

कुछ समय पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री से बेहूदगी की भाषा पेश आने वाले बीबीसी हिंदी पत्रकार सरकार के प्रति सच्ची निष्ठा पेश करने की होड़ साबित करने में भाषाई स्तर को गिराकर अव्वल आने में अपने संस्थान का इस्तेमाल कर रहे हैं!

यह मामला उस समय हुआ जब हैदराबाद के सांसद बीबीसी हिंदी स्टूडियो में मेहमान के तौर पर गए! दो पत्रकार एक सांसद से सवाल जवाब किए तभी एक रिपोर्टर सांसद से तीखे लफ्जों में बोलता है किए आपने कौन से झंडे गाड़े हैं घ् यह शब्द एक पत्रकार का नहीं लगता क्योंकि यह भाषा गली.मुहल्ले के मवालियों की है! जिसे एक पत्रकार ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान में खड़े होकर बोला! इससे पता चलता है की भाषा का स्तर कितना गिर गया है! इस भाषा का असर युवाओं पर क्या पड़ेगा!

दरअसल बिहार में बीजेपी की असफलता पर बौखलाए पत्रकार ने काउंटर सवाल करते हुए अपनी भाषा की मर्यादा औऱ दिमागी संयम खो दिया! जिससे बीबीसी की प्रतिष्ठा औऱ साख पर सवाल खड़े हो रहे है! कि वो दर्शकों को क्या दे रहें हैं एक निचली भाषा जो भारतीय समाज में योग्य नहीं है!

 

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