अनुपम खेर फिर उतरे मैदान में

अनुपम खेर फिर उतरे मैदान में

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वैसे तो अनुपम खेर को हमेशा से ही बीजेपी के समर्थन में बड़ चड़ कर हिस्सा लेते देखा गया है! चाहैं वह असहिष्णुता हो या फिर जेएनयू विवाद हर समय अनुपम बीजेपी के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए नज़र आए! यहां तक की सड़कों पर भी उतरकर सरकार का सर्मथन किया!

विधानसभा परिसर में तीन दिनों से चल रहे लोक.मंथन के समापन समारोह में पहुंचे खेर ने कहा कि देशभक्ति हमें न सिखाओ! यह सही है कि कोई किसी को देशभक्ति नहीं सिखा सकताए यह तो भीतर से आती है! देशभक्ति हमारे खून में है! जब भी अवसर आता हैए यह प्रकट होती है! देशभक्ति की बात से अगर किसी को पीड़ा होती है तो होने दीजिएए हम तो अपना काम करेंगे!

उन्होंने कहा कि पिछले दो.तीन सालों में असहिष्णुता और देशभक्ति के विषय जान.बूझकर उठाए गए हैं! जब असहिष्णुता की बहस शुरू की गईए तब मेरे भीतर का भारतीय जागा और उसने कहा कि यह चुप रहने का समय नहीं है! इस कारण मैंने असहिष्णुता पर सवाल उठाने वालों का खुलकर विरोध किया! खेर ने कहा कि वह कश्मीरी पंडित हैंए इसलिए उनकी रगों में देशभक्ति है! अपने ही देश में निर्वासित होने के बाद भी कश्मीरी पंडितों ने कभी भी देश के खिलाफ कोई बात नहीं कही!

उन्होंने कहा कि प्रदूषण के लिए प्लास्टिक को जिम्मेदार ठहराया जाता हैए लेकिन प्लास्टिक उत्पादन रोकने की बात नहीं होती! आज चारों ही स्थितियां सहज नहीं हैं! देश में प्रदूषण का बोलबाला है! स्वच्छ पानी नहीं है! गति की शीघ्रता और स्थिति की स्थिरता ने विचित्र परिस्थिति पैदा कर दी है! हर व्यक्ति चुनौतियों की चर्चा करता है! समाधान किसी के पास नहीं है! उन्होंने आगे कहा कि हिंसा की अत्यधिक वृद्धिए युद्ध और आतंकवाद के रूप में दिखाई देती है! मनुष्य कहीं भी स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करता है! महाभारत का युद्ध 18 दिन में समाप्त हो गयाए लेकिन वियतनाम का 18 वर्ष चला। अपना शस्त्र बाजार बनाए रखने के लिए तब भी हिंसा हुईए जो आज तक जारी है!

 

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