रक्षक बने भक्षक, छत्‍तीसगढ़ पुलिस ने 16 आदिवासी महिलाओं के साथ किया...

रक्षक बने भक्षक, छत्‍तीसगढ़ पुलिस ने 16 आदिवासी महिलाओं के साथ किया रेप

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देश में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामले साल दर साल बढ़ते जा रहे है। इसके लिए फास्ट ट्रेक कोर्ट भी बनाई गई परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। अब सवाल पुलिस और प्रशासन पर की साख पर है क्योंकि रक्षक ही भक्षक बन जाए तो देश की सुरक्षा की बागडोर किसके हाथों में सोंपी जाए।

बीते साल अक्तूबर महीने में छत्‍तीसगढ़ पुलिस के सहायक आरक्षकों ने बस्‍तर संभाग में रैली निकालकर सामाजिक कार्यकर्ताओं हिमांशु कुमार, बेला भाटिया, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर सहित कई पत्रकारों का पुतला जलाकर अपना विरोध जताया था।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना था कि यहाँ के सुरक्षा बल जवान और पुलिस कर्मी आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहें है जो बात सुरक्षा बलों को नाकाबिले बर्दाश्त लग रही थी। उस दौरान तो यह मामला नज़रंदाज़ कर दिया गया। लेकिन अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी अपनी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर 16 महिलाओं का बलात्कार किया गया।

आयोग द्वारा की जा रही जांच में 20 और महिलाओं के बयान रिकॉर्ड किए जाने हैंए जिनके साथ सुरक्षाबलों ने दुराचार का प्रयास किया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बीजापुर जिले के पेगदापल्ली, चिन्नागेलुरए पेद्दागेलुर, गुंडम और बर्गीचेरू गांवों में महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया। पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के प्राइवेट पार्ट्स को नुकसान भी पहुंचाया।

इसके साथ ही राष्ट्रीय मनावाधिकार आयोग ने महिलाओं पर हुए इस अत्या चार के लिए राज्यय सरकार को भी जिम्मेदार माना है और उन्हें इससे संबंधित एक नोटिस भी भेजा है। आयोग ने यह भी कहा कि वह 20 अन्य महिलाओं के बयान दर्ज नहीं कर पाया और एनएचआरसी ने एक माह के भीतर इन महिलाओं के बयान की मांग की है। एनएचआरसी ने प्रथम दृष्टतया पाया है कि छत्तीसगढ़ में राज्य पुलिसकर्मियों द्वारा 16 महिलाओं के साथ बलात्कारए यौन और शारीरिक हमला किया गया है।

आयोग ने अपने मुख्य सचिव के माध्यम से राज्य सरकार को नोटिस भेजकर इस बात का कारण पूछा है कि क्यों नहीं इसे उनके लिए अंतरिम 37 लाख रुपये की आर्थिक मदद की अनुशंसा करनी चाहिए। इसमें बलात्कार की आठ पीड़िताओं के लिए तीन-तीन लाख रुपये और यौन हमले की छह पीड़िताओं के लिए दो-दो लाख रुपये और शारीरिक हमले की दो पीड़िताओं के लिए 50-50 हजार रुपये शामिल हैं।

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