इंसान बना बैल, 12 किलोमीटर तक खींची बैलगाड़ी, सभी हो गए हैरान

इंसान बना बैल, 12 किलोमीटर तक खींची बैलगाड़ी, सभी हो गए हैरान

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हमें आज़ाद हुए 70 साल हो गए है लेकिन देश का मजदूर आज भी आज़ाद नहीं है मध्यप्रदेश के गुना के जामनेर कस्बे की से दिल को झकझोरने वाली ये तस्वीर सामने आयी है। यह तस्वीर देश के विकास की हकीकत बयां कर रही है। एक बेबस इंसान बैल के साथ दूसरे छोर से बैलगाड़ी खींच रहा है और पीछे उसकी पत्नी एक हाथ में बच्चा लिए गाड़ी को धक्का दे रही है।

राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में चाकू छुरियां बेचकर अपना व अपने परिवार की भूख मिटाने वाला मोहन बंजारा खुद बैलगाड़ी खींचकर गरीबी से संघर्ष करने की मिसाल पेश करता दिखा। अपने बैल की बेवक्त हुई मौत की वजह से गरीब मोहन को बैलगाड़ी के दूसरे छोर पर खुद जुतना पड़ाए ताकि उसका परिवार भूखा न रहे।

ईनाडु की रिपोर्ट के अनुसार मोहन ने बैलगाड़ी में जुतकर 12 किलोमीटर तक गाड़ी खींची। पसीने में तर-बतर मोहन जब जामनेर पहुंचा तो उसे देख लोग हैरान रह गए। गरीब परिवार को देख लोगों का दिल पसीज आया इस दौरान कुछ लोगों ने मोहन व उसके परिवार के खाने पीने की व्यवस्था भी की। उसकी पत्नी राधोबाई उसका साये की तरह साथ निभाते हुए दुधमुंहे बच्चे को गोद में लटकाकर बैलगाड़ी को धक्का देती रही।

हैरानी की बात तो यह है की किसी भी अफसर या जनप्रतिनिधि की नजर इस लाचार दंपत्ति पर नहीं पड़ी। लोगों द्वारा पूछे जाने पर मोहन ने अपनी आपबीती सुनाईए जिसे सुन सभी दंग रह गए। लेकिन संघर्ष शील मोहन ने हिम्मत नहीं हारीए उसने कहा कि जब तक हिम्मत है वह ऐसे ही गाड़ी खींचकर अपना सामान बेचेगा और पैसे बचाकर दूसरा बैल खरीदेगा।

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