पहली बार एक महिला की मदद करने के लिए सुषमा ने जतायी...

पहली बार एक महिला की मदद करने के लिए सुषमा ने जतायी असर्मथता

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सुषमा स्वराज ने शायद पहली बार एक महिला की मदद करने से इंकार कर दिया है। सुषमा ने ईरान की उस विदेशी महिला की मदद कर पाने में असमर्थता जाहिर की जिसका केस उड़ीसा के लोकल कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने उसको एक साल की सजा और 3 लाख रुपए का जुर्माना देने के लिए कहा हुआ है। महिला ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका डाली हुई है जिसपर फिलहाल कोई कार्यवाही नहीं हुई है। इस पर सुषमा स्वराज ने लिखा मुझे उड़ीसा सरकार से रिपोर्ट मिल गई है। यह मामला न्यायिक जांच के अंदर है। इस वजह से मैं कोई मदद नहीं कर सकती।

2011 में नरगिस ने परीशन नाम की अपनी एनजीओ खोल ली थी। वहां वह अनाथ लड़के.लड़कियों के साथ.साथ गांव के बाकी बच्चों को पढ़ाने लिखाने का काम कर रही थी। 2014 में एक दिन नरगिस वहां पढ़ने वालों को लेकर फील्ड ट्रिप पर गई थीं। वहां एक नेत्रहीन बच्चा नदी में गिर गया था जिससे उसकी मौत हो गई थी। लेकिन बच्चे के घरवालों ने पैसे के लालच में आकर नरगिस के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी। परिवार ने आरोप लगाया कि नरगिस ने उनके बच्चे को पानी में फेंका था।

नरगिस आसत्री नाम की महिला का जन्म ईरान में हुआ था। उनके पास ब्रिटेन की नागरिकता है फिलहाल वह परीशन फाउंडेशन के एक एनजीओ से जुड़ी हुई हैं। लेकिन पासपोर्ट रद्द होने की वजह से भारत में फंस गई थीं। बाद में उन्हें कामगारों वाला वीजा दिया गया था। वह वीजा उड़ीसा के ही एक एनजीओ ASSIST (Asia Society for Social Improvement and Sustainable Transformation) की मदद से दिलवाया गया था

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