176 सालों से एक बोतल में बंद है, डियागो एल्विस का सिर।

176 सालों से एक बोतल में बंद है, डियागो एल्विस का सिर।

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पुर्तगाल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले डियागो एल्विस का सिर पिछले 176 सालों से एक बोतल में बंद है। जी हां, ये बात बिल्कुल हैरान कर देने वाली है लेकिन 100 टका सच है। डियागो का सिर बोतल में बंद करने के पीछे एक कारण है। बताया जाता है कि डियागो के सिर की ऐसी हालत उसके कर्मों की वजह से हुई है। उसका सिर आज भी मौजूद है और एक बोतल में प्रिजर्व करके रखा गया है।

पुर्तगाल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले डियागो एल्विस का सिर पिछले 176 सालों से एक बोतल में बंद है। जी हां, ये बात बिल्कुल हैरान कर देने वाली है लेकिन 100 टका सच है। डियागो का सिर बोतल में बंद करने के पीछे एक कारण है। बताया जाता है कि डियागो के सिर की ऐसी हालत उसके कर्मों की वजह से हुई है। उसका सिर आज भी मौजूद है और एक बोतल में प्रिजर्व करके रखा गया है।  डियागो का जन्म तो साल 1810 में स्पेन में हुआ था लेकिन वो पढ़ाई और नौकरी के लिए पुर्तगाल आ गया था। यहां काफी समय तक बेरोजगार रहने की वजह से उसने गुजर-बसर करने के लिए अपराध का रास्ता अपनाना ठीक समझा। ऐसे में उसने किसानों के साथ लूटपाट करने और उन्हें जान से मारना शुरू कर दिया।  डियागो इन किसानों को मारकर इनकी लाश के टुकड़े करके नदी में फेंक देता था। जब यह मामला पुलिस को पता चला तो उन्होंने जांच शुरू की। तब पुलिस को लगा कि शायद किसान काम न मिलने की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन बाद में किसानों के मरने की संख्या में इजाफा हो गया। इससे पुलिस को शक हुआ कि यह आत्महत्याएं नहीं हत्याए हैं।    जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो डियागो कुछ समय के लिए शांत हो गया। मगर बाद में फिर डियागो ने लूटपाट और लोगों को मारना शुरू कर दिया, लेकिन इस बार उसने अपना एक गैंग बनाया ताकि वो ज्यादा से ज्यादा लोगों से लूटपाट कर उन्हें मौत के घाट उतार शुरू सके। इस बार उसने किसानों के साथ और भी कई लोगों को अपना शिकार बनाया।  मगर उसका यह घिनौना काम ज्यादा दिन पुलिस से छिप नहीं पाया। दरअसल, उसने इस बार एक बड़ी गलती कर दी थी जो पुलिस के सामने आ गई। डियागो ने एक डॉक्टर का खून कर दिया था और इस मामले की सूचना पुलिस को मिल गई थी। पुलिस ने जांच में पता लगा लिया था कि ये काम डियागो का है। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।  पुलिस ने डियागो को गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ शुरू की। पहले तो उसने कुछ नहीं बताया, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे टॉर्चर किया तब उसने कबूल किया कि लूटपाट के चलते उसने करीब 70 लोगों को मौत के घाट उतारा है। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई। मगर इस दौरान कुछ वैज्ञानिकों ने कोर्ट से अनुरोध किया कि डियागो को फांसी देने के बाद उसका सिर उन्हें दे दिया जाए।

डियागो का जन्म तो साल 1810 में स्पेन में हुआ था लेकिन वो पढ़ाई और नौकरी के लिए पुर्तगाल आ गया था। यहां काफी समय तक बेरोजगार रहने की वजह से उसने गुजर-बसर करने के लिए अपराध का रास्ता अपनाना ठीक समझा। ऐसे में उसने किसानों के साथ लूटपाट करने और उन्हें जान से मारना शुरू कर दिया।

पुर्तगाल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले डियागो एल्विस का सिर पिछले 176 सालों से एक बोतल में बंद है। जी हां, ये बात बिल्कुल हैरान कर देने वाली है लेकिन 100 टका सच है। डियागो का सिर बोतल में बंद करने के पीछे एक कारण है। बताया जाता है कि डियागो के सिर की ऐसी हालत उसके कर्मों की वजह से हुई है। उसका सिर आज भी मौजूद है और एक बोतल में प्रिजर्व करके रखा गया है।  डियागो का जन्म तो साल 1810 में स्पेन में हुआ था लेकिन वो पढ़ाई और नौकरी के लिए पुर्तगाल आ गया था। यहां काफी समय तक बेरोजगार रहने की वजह से उसने गुजर-बसर करने के लिए अपराध का रास्ता अपनाना ठीक समझा। ऐसे में उसने किसानों के साथ लूटपाट करने और उन्हें जान से मारना शुरू कर दिया।  डियागो इन किसानों को मारकर इनकी लाश के टुकड़े करके नदी में फेंक देता था। जब यह मामला पुलिस को पता चला तो उन्होंने जांच शुरू की। तब पुलिस को लगा कि शायद किसान काम न मिलने की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन बाद में किसानों के मरने की संख्या में इजाफा हो गया। इससे पुलिस को शक हुआ कि यह आत्महत्याएं नहीं हत्याए हैं।    जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो डियागो कुछ समय के लिए शांत हो गया। मगर बाद में फिर डियागो ने लूटपाट और लोगों को मारना शुरू कर दिया, लेकिन इस बार उसने अपना एक गैंग बनाया ताकि वो ज्यादा से ज्यादा लोगों से लूटपाट कर उन्हें मौत के घाट उतार शुरू सके। इस बार उसने किसानों के साथ और भी कई लोगों को अपना शिकार बनाया।  मगर उसका यह घिनौना काम ज्यादा दिन पुलिस से छिप नहीं पाया। दरअसल, उसने इस बार एक बड़ी गलती कर दी थी जो पुलिस के सामने आ गई। डियागो ने एक डॉक्टर का खून कर दिया था और इस मामले की सूचना पुलिस को मिल गई थी। पुलिस ने जांच में पता लगा लिया था कि ये काम डियागो का है। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।  पुलिस ने डियागो को गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ शुरू की। पहले तो उसने कुछ नहीं बताया, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे टॉर्चर किया तब उसने कबूल किया कि लूटपाट के चलते उसने करीब 70 लोगों को मौत के घाट उतारा है। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई। मगर इस दौरान कुछ वैज्ञानिकों ने कोर्ट से अनुरोध किया कि डियागो को फांसी देने के बाद उसका सिर उन्हें दे दिया जाए।

डियागो इन किसानों को मारकर इनकी लाश के टुकड़े करके नदी में फेंक देता था। जब यह मामला पुलिस को पता चला तो उन्होंने जांच शुरू की। तब पुलिस को लगा कि शायद किसान काम न मिलने की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन बाद में किसानों के मरने की संख्या में इजाफा हो गया। इससे पुलिस को शक हुआ कि यह आत्महत्याएं नहीं हत्याए हैं।

पुर्तगाल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले डियागो एल्विस का सिर पिछले 176 सालों से एक बोतल में बंद है। जी हां, ये बात बिल्कुल हैरान कर देने वाली है लेकिन 100 टका सच है। डियागो का सिर बोतल में बंद करने के पीछे एक कारण है। बताया जाता है कि डियागो के सिर की ऐसी हालत उसके कर्मों की वजह से हुई है। उसका सिर आज भी मौजूद है और एक बोतल में प्रिजर्व करके रखा गया है।  डियागो का जन्म तो साल 1810 में स्पेन में हुआ था लेकिन वो पढ़ाई और नौकरी के लिए पुर्तगाल आ गया था। यहां काफी समय तक बेरोजगार रहने की वजह से उसने गुजर-बसर करने के लिए अपराध का रास्ता अपनाना ठीक समझा। ऐसे में उसने किसानों के साथ लूटपाट करने और उन्हें जान से मारना शुरू कर दिया।  डियागो इन किसानों को मारकर इनकी लाश के टुकड़े करके नदी में फेंक देता था। जब यह मामला पुलिस को पता चला तो उन्होंने जांच शुरू की। तब पुलिस को लगा कि शायद किसान काम न मिलने की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन बाद में किसानों के मरने की संख्या में इजाफा हो गया। इससे पुलिस को शक हुआ कि यह आत्महत्याएं नहीं हत्याए हैं।    जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो डियागो कुछ समय के लिए शांत हो गया। मगर बाद में फिर डियागो ने लूटपाट और लोगों को मारना शुरू कर दिया, लेकिन इस बार उसने अपना एक गैंग बनाया ताकि वो ज्यादा से ज्यादा लोगों से लूटपाट कर उन्हें मौत के घाट उतार शुरू सके। इस बार उसने किसानों के साथ और भी कई लोगों को अपना शिकार बनाया।  मगर उसका यह घिनौना काम ज्यादा दिन पुलिस से छिप नहीं पाया। दरअसल, उसने इस बार एक बड़ी गलती कर दी थी जो पुलिस के सामने आ गई। डियागो ने एक डॉक्टर का खून कर दिया था और इस मामले की सूचना पुलिस को मिल गई थी। पुलिस ने जांच में पता लगा लिया था कि ये काम डियागो का है। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।  पुलिस ने डियागो को गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ शुरू की। पहले तो उसने कुछ नहीं बताया, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे टॉर्चर किया तब उसने कबूल किया कि लूटपाट के चलते उसने करीब 70 लोगों को मौत के घाट उतारा है। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई। मगर इस दौरान कुछ वैज्ञानिकों ने कोर्ट से अनुरोध किया कि डियागो को फांसी देने के बाद उसका सिर उन्हें दे दिया जाए।

जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो डियागो कुछ समय के लिए शांत हो गया। मगर बाद में फिर डियागो ने लूटपाट और लोगों को मारना शुरू कर दिया, लेकिन इस बार उसने अपना एक गैंग बनाया ताकि वो ज्यादा से ज्यादा लोगों से लूटपाट कर उन्हें मौत के घाट उतार शुरू सके। इस बार उसने किसानों के साथ और भी कई लोगों को अपना शिकार बनाया।

मगर उसका यह घिनौना काम ज्यादा दिन पुलिस से छिप नहीं पाया। दरअसल, उसने इस बार एक बड़ी गलती कर दी थी जो पुलिस के सामने आ गई। डियागो ने एक डॉक्टर का खून कर दिया था और इस मामले की सूचना पुलिस को मिल गई थी। पुलिस ने जांच में पता लगा लिया था कि ये काम डियागो का है। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने डियागो को गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ शुरू की। पहले तो उसने कुछ नहीं बताया, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे टॉर्चर किया तब उसने कबूल किया कि लूटपाट के चलते उसने करीब 70 लोगों को मौत के घाट उतारा है। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई। मगर इस दौरान कुछ वैज्ञानिकों ने कोर्ट से अनुरोध किया कि डियागो को फांसी देने के बाद उसका सिर उन्हें दे दिया जाए।

 

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