फिर एक मुस्लिम नौजवान की हिरासत में हत्या, चोरी के इल्ज़ाम में...

फिर एक मुस्लिम नौजवान की हिरासत में हत्या, चोरी के इल्ज़ाम में सजा-ए-मौत

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मेंहदी हसन एैनी का विशेष लेख

बंगाल का फरदीन बना पुलिसिया तांडव का
शिकार, थर्ड डिग्री से हुयी दर्दनाक मौत

अभी हम नजीबए मिन्हाज और भोपाल को भूले भी नही थे कि बंगाल पुलिस ने संघी मानसिकता दिखाकर 18 वर्षीय फरदीन खान को मामूली इल्ज़ाम के बदले पीट पीटकर मार डाला! 19 नवम्बर को हुये इस बेरहम हत्या का राज़ इतने दिनों तक इस लिये छिपा थाए क्योंकि बंगाल की माफिया पुलिस ने मक़तूल फरदीन के घर वालों और उसके दोस्तों को जान से मारने की धमकी तक दे डाली!

बात बात को ब्रेकिंग न्यूज़ बनाने वाली मीडिया ने भी मुजरिमाना तौर पर इस पूरे घटनाक्रम को अभी तक छुपाये रखाए फरदीन खान के खालू (मौसा) नासिर हुसैन ने इंसाफ़ इंडिया मुहिम के कार्यकर्ताओं को बताया कि फरदीन खान की पडोस के एक लड़के से पहले से ही आपसी कलह थी जो थाने का मुखबिर भी है! और उसने फरदीन खान के बारे पुलिस को मोबाइल चोरी की रिपोर्ट दीए पुलिस ने उसी रिपोर्ट के आधार पर 6 नवम्बर की शाम को फरदीन को गिरफ्तार करके दूसरे दिन जेल भेज दिया!

16 नवम्बर को कोलकाता लाल बाज़ार थाना पुलिस ने फरदीन खान पर किसी दूसरे केस का आरोप लगाकर कोर्ट से पुलिस रिमांड मे लिया! जहां उसे उसे थर्ड डिग्री टार्चर दिया गया! इसके बाद 17 नवम्बर को फरदीन खान को बंसल कोर्टए कोलकाता में पेश कियाए कोर्ट ने पूरे मुआमले को संज्ञान में लेते हुए पुलिस को फटकार लगायी और फरदीन खान का इलाज़ कराने का आर्डर दिया!

फरदीन को कोलकाता पीजी हॉस्पिटल ले जाया गया और भर्ती कराया गया! 19 नवम्बर को लगभग 2रू30 बजे फरदीन खान की मौत कोलकाता पीजी हॉस्पिटल में हो गयी! पुलिस के अत्याचारों से वो बेकसूर दूनिया को अलविदा कह दिया!

अब फरदीन खान की मौत के बाद कोलकाता लालबाज़ार थाने के पुलिस पदाधिकारी पाण्डेय, सुमीत विश्वाश, एके घोष, आची और हवलदार पिंटू के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा 302 के तहत हत्या का केस दर्ज करा दिया गया है!

बंगाल पुलिस की गुंडागर्दी और हेवानियत तब और भी ज्यादा उजागर हो गई जब रागिब अहमद (फरदीन के दोस्त) को लाल बाजार थाना पुलिस से बात करने गया! हालांकि रागिब पर किसी तरह का कोई अपराधिक आरोप नही है लेकिन शाही पुलिस को यह सवाल ही बुरा लगा और बहादुर पुलिस ने रागिब को भी बेरहमी से पीटा!

यदि पुलिस की इस गंडागर्दी पर गौर किया जाए तो प्रशासन की साख पर कुछ सवाल उठते हैं! आखिर फरदीन का जुर्म कितना बड़ा था कि पुलिस उसे बार बार थर्ड डिग्री दी और उसकी मौत हो गई!

संकेत तो इस और इशारा कर रहैं हैं कि पुलिस ने मुखबिर की खबर पर बगैर तहक़ीक़ जाने पुलिस ने फरदीन को उठाया और फिर जब इल्ज़ाम साबित नहीं हुआ तो दूसरा जुर्म उसके सिर मंड़ दिया और रिमांड के नाम पर हत्या का सर्टिफिकेट हासिल कर लिया हो! ताकि एक मुसलिम नौजवान को बड़ी आसानी से मौत के घाट उतार दिया जाए!

पुलिस ने फरदीन के दोस्त रागिब को किस जुर्म की बुनियाद पर बेदर्दी से मारा! हत्यारे पुलिस कर्मियों पर 302 का मुक़दमा होने के बावजूद 12 दिन बाद भी अभी तक उनको गिरिफ्तार क्यों नहीं किया गया!

इस मामले पर ममता सरकारए कोलकाता पुलिस प्रशासनए बंसल कोर्ट और मीडिया सभी की खामोशी क्या बताना चाह रही है! शायद बेगुनाह की मौत नोटबंदी से बड़ा मुद्दा नहीं है! और ना ही इससे किसी पार्टी या मिडीया को कोई फायदा भी नहीं होगा! इसलिए आज सभी की ज़ुबान पर ताले हैं!

मोहसिन शेखए मिन्हाजए नजीबए भोपाल और इन जैसे सभी मुआमलों के बाद अब यह सवाल करना बहोत ज़रूरी हो गया है कि क्या सरकार द्वारा पुलिस को बगैर दलीलए बगैर वकीलएऔर बगैर अपील के ही जज बनने का सर्टिफिकेट दे दिया गया है! अगर क़ानून के संरक्षण में ही इस तरह से हत्या का खेल चलता रहा तो अदालतों में ताले डाल कर थानेदारों को जज बना देना चाहिए!

केंद्रीय सरकारए राज्य सरकारें और सुप्रीम कोर्ट क्या अब भी इस तरह के हत्यारे पुलिस कर्मियों को सिर्फ़ इस लिये माफ़ कर देंगें कि इससे पुलिस का मोरल डाऊन होगा!

यहां सवाल आम आदमी की जान का नहीं बल्कि अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की जान का है मोदी सरकार के लिए शायद यही हैं अच्छे दिन के बेगुनाह मुसलमानों को झूठे आरोपों में गिरफ्तार कर के उनकी हत्या कर दी जाए!

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