मोदी को औकात बताने लगे हैं भक्त

मोदी को औकात बताने लगे हैं भक्त

42
SHARE

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय जनता पार्टी को चेतावनी दी है कि लोगों का मन सरकार के प्रदर्शन पर तेज़ी से बदल रहा है.
आरएसएस ने हाल ही में तीन दिवसीय बैठक का आयोजन किया, जिसमें संघ के आनुषांगिक संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इन संगठनों के प्रतिनिधियों की रिपोर्ट की गहरी समीक्षा की. जानकारों के मुताबिक़ आरएसएस ने पार्टी को बताया कि आर्थिक मंदी, नौकरियों की कमी, बड़े नोटों पर प्रतिबंध के नकारात्मक परिणाम और किसानों की समस्या मुद्दा बनती दिख रही है.
जो लोग सरकार के समर्थक हैं वे अब इन पहलुओं पर सरकार के प्रदर्शन के बारे में सवाल पूछ रहे हैं. नोटबंदी का प्रचार इस तरह से किया गया था कि ये कदम करोड़ों रुपये के काले धन को पकड़ लेगा और सरकार समर्थकों को ये समझाया गया कि इससे उन्हें सीधे लाभ होगा. अब, इस कदम की नाकामी के बाद उन्हें लगता है कि सरकार ने उन्हें धोखा दिया है. हिंदुस्तान की राजनीति में इस समय हिंदुत्व अपने चरम पर है और सरकार ने पिछले तीन सालों में आरएसएस के हिंदुत्व एजेंडो को आगे बढ़ाया है.
इसी एजेंडे की वजह से उन्हें देश के कई हिस्सों से बड़ा समर्थन मिला. लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि हिंदुत्व की राजनीति के कुछ नुक़सान भी हैं.
मोदी राजनीति के एक अनुभवी खिलाड़ी है. उन्हें एहसास है कि हकीकत की जमीन पर क्या कुछ चल रहा है. उनके बर्ताव में भी इसका असर देखा जा सकता है. पिछले दिनों म्यांमार यात्रा के दौरान मोदी रंगून में मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफर के मकबरे पर गए. ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब भारत में मुगल बादशाहों को अपराधी बताया जाता रहा है. मोदी सरकार को सत्ता में आए तीन साल हो गए हैं. पिछले तीन सालों में, देश की अर्थव्यवस्था सुस्त हो गई है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आने वाले तिमाही में भी इसी तरह की मंदी के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं. देश का निर्यात कम हो रहा है. औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि नहीं हुई है. सरकार रोज़गार के मौके नहीं पैदा कर पा रही है. इंफॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी से लेकर कृषि क्षेत्र संकट से गुजर रहे हैं.
सरकार ने बैंकों में जमा धन पर ब्याज दर कम कर दी है लेकिन बैंक से मिलने वाले कर्ज के ब्याज पर इससे फर्क नहीं पड़ा है. लाखों घर तैयार हैं और उनके पास कोई खरीदार नहीं है. देश की कई बड़ी निर्माण कंपनियों दिवालिया हो गई हैं.
मोदी सरकार ने पिछले तीन सालों में बहुत नारे दिए हैं, लेकिन हकीकत में बड़े बदलाव के लिए अभी तक कोई ठोस काम नहीं किया गया हो, ऐसा नहीं दिखता. मोदी और उनकी पार्टी ने पिछले सालों में अपने विरोधियों को परास्त कर दिया. उन्होंने लोगों के सामने खुद को उम्मीद की ऐसी किरण के तौर पर पेश किया जो देश की सभी समस्याओं का समाधान कर देगा. वे लोगों की उम्मीदों को बढ़ाते हैं ताकि वे उनसे किसी सियासी चमत्कार की उम्मीद कर सकें. अगले लोकसभा चुनाव अब सिर्फ दो साल हैं. मोदी और उनके साथी अमित शाह पहले से ही आगामी चुनावों की तैयारी कर रहे हैं. जब जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे अहमदाबाद आए तो मोदी उन्हें 16वीं सदी की एक मस्जिद दिखाने ले गए. कश्मीर में अचानक बातचीत की पहल हुई है. नए मंत्रियों को कैबिनेट में जोड़ा गया है और कई मंत्रियों के विभाग बदले गए हैं. मध्य प्रदेश के बाद, किसानों ने राजस्थान और अन्य राज्यों में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं. अगले कुछ दिनों में आरएसएस कार्यकर्ता अपनी सरकार के खिलाफ विरोध करने जा रहे हैं.
मोदी की लोकप्रियता अभी भी काफी मजबूत है लेकिन अगला लोकसभा चुनाव केवल इसी बूते नहीं जीता जा सकता.
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सर्वाधिक लोकप्रियता के बावजूद 2004 में भाजपा हार गई थी.

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY