जैव विवधता का खतरा

जैव विवधता का खतरा

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बढ़ती इंसानी गतिविधियों के कारण कई सदियों से  दुनिया भर में जंगली जानवरों व पक्षियों की संख्या में भारी कमी आयी है साथ ही कई प्रजातियाँ विलुप्त भी हो गयी ! इसका महत्वपूर्ण कारण है शिकार करना, जंगलों का विनाश, सोशल नेटवर्किंग साइट्स का अधिक से अधिक प्रयोग जिससे निकलने वाली रेडिएशन और  प्रदुषण इत्यादि! यदि ये सिलसिला यूं ही जारी रहा तो जैव विविधता खत्म हो जाएगी जिसपर सबका जीवन टिका हुआ है!

शोधकर्ताओं के अनुसार कई जीवों की प्रजातियों में कमी आयी है जिसमें पक्षी, मछली, स्तनधारी, उभयचर और सरीसृप की अलग अलग करीब चार हजार प्रजातियों को शामिल है! कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकीं हैं! जिनमें महत्वपूर्ण है

डोडो(रैफस कुकुलेट्स ) :- यह हिन्द महासागर के द्वीप मोरिशस का एक स्थानीय पक्षी है यह पक्षी होते हुए भी थलचर था इसमें उड़ने की क्षमता नहीं थी! 17 वीं सदी तक यह पकड़ी मानव द्वारा शिकार के कारण विलुप्त हो गया! यह कबूतर के परिवार से सम्बन्ध रखता था! 20 किलोग्राम वज़न का यह पक्षी मुर्गे के आकार का होता है! सबसे पहले मोरिशस में पहुंचे डच लोगों ने इस पक्षी का शिकार करना आरंभ किया!

dodoलाल पांडा:- इसको भालू , बिल्ली या लाल बिल्ली भी कहा जाता है! यह एक स्तनपायी जानवर है जो हिमालय, चीन में पाया और मुख्य रूप से सुबह शाम ही सक्रिय होता है! इसके छोटे पैर, शरीर पर बाल होते है! हालाँकि यह विलुप्त हो  चूका है! परन्तु 1970 के समय इसे नेपाल में देखा गया था!

laal-pandaहाथी पक्षी :- यह एक विशाल पक्षी  था जो की मेडागास्कर में 17 वीं सदी में पाया जाता था! फ्रंसीसी गवर्नर ने अपने एक लेख में इसका वर्णन किया है! 13 सदी के दौरान कई प्रकार की कहानियों में इस प्रकार के पक्षियों का वर्णन है!

hathi

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