केजरीवाल ने मोदी को जमकर कोसा, उड़ाई माया-मुलायम की नींद

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आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल खफा पीएम नरेंद्र मोदी से थे, लेकिन उनकी रैली टेंशन बहुजन समाज पार्टी की मायावती और समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह को दे गई। मेरठ के इतिहास में केजरीवाल की रैली भी भीड़ के लिहाज से बीजेपी, सपा और बीएसपी की तरफ से होने वाली रैलियों सरीखी ही थी। भीड़ हजारों में थी। केजरीवाल से लेकर आम वॉलिंटियर तक के चेहरे खिले थे। दिल्ली के सीएम ने मोदी पर रिश्वत लेने तक की तोहमत लगाई। चोर कहा। गरीबों का विरोधी बताया। उद्योगपितयों का हमदर्द करार दिया। घोटालेबाज तक कह डाला। खुद केजरीवाल ने वोट मांगने आने वाले भाजपाइयों को खाली हाथ लौटाने की सलाह लोगों को दी। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बीजेपी और मोदी पर देश को बेचकर खाने तक की तोहमत लगा दी। यूपी के हाथ देश की चाबी बताकर लोगों से बीजेपी को वोट नहीं देने की अपील की। दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने भाजपाइयों को झूठा देशभक्त करार दिया। बीजेपी से सतर्क रहने की सलाह दी। उसको वोट नहीं देने की गुजारिश की। आप से और साथ आई भीड़ और इसके दिग्गजों के हमले के बाद भी बीजेपी टेंशन में नहीं हैं। वजह, रैली में जुटी भीड़ में ज्यादातर मुस्लिमों की भागीदारी रही। यह वर्ग बीजेपी नहीं बल्कि सपा और बीएसपी का माना जाता है। हालांकि हिंदू, सिख आदि की तादाद भी सम्मानजनक थी। रैली में मुस्लिम महिलाओं की बड़ी भागीदारी सबको चौंका गई। जहां रैली थी वह यूपी के कद्दावर मंत्री शाहिद मंजूर और बीएसपी के जोनल कॉर्डिनेटर सांसद मुनकाद अली के विधानसभा क्षेत्र में थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर यह भीड़ आप की तरफ 2017 के चुनाव में रुख कर गया तब मुस्लिमों के बंटवारे के चलते सपा और बीएसपी को नुकसान और बीजेपी को उल्टा फायदा होगा। बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष अश्वनी त्यागी का कहना है कि आप का यूपी में कोई जनाधार नहीं है। ऐसी रैलियों को बीजेपी महत्व नहीं देती। सपा के दर्जा प्राप्त मंत्री चौधरी राजपाल सिंह रैली में आई भीड़ को दिल्ली की बताते हैं और कहते हैं कि किठौर में तीन बार से सपा का विधायक है। वह हमारा अभेद किला है। बीएसपी के जिला प्रभारी परवेज गोलू का कहना है कि बीएसपी का वोटर दिल से जुड़ा है। आप को कोई वोट नहीं देगा।

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